इंटरनेट क्या है | What is Internet in hindi?

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internet kya hai

इंटरनेट क्या है – What is Internet in hindi?

इंटरनेट एक नेटवर्क जाल होता है जो ग्लोबल स्तर पर सभी कंप्यूटर को इंटरकनेक्ट करता है। इन्टरनेट एक वाइड एरिया नेटवर्क होता है जो किसी इन्टरनेट यूजर को वेब पर स्टोर्ड (स्थित) किसी भी डाटा या इनफार्मेशन को एक्सेस करने की सुविधा देता है। इसके द्वारा दी गयी कई तरह की सर्विसेज हैं जैसे ईमेल, वेब पोर्टल्स, चैट, सोशल नेटवर्किंग ब्लॉगिंग, ऑनलाइन लेन-देन इत्यादि।

विश्व में प्रतिदिन एक करोड़ से भी अधिक लोगों द्वारा उपयोग होने वाला, हजारों तकनीकों और दर्जनों सर्विसेज का एक बहुत ही कॉम्लेक्स कॉम्बिनेशन हैं। इंटरनेट केबल या टेलीफोन लाइन से जुड़े कम्य्यूटरों की एक ऐसी
दुनिया भर के सांठगांठ का सिलसिला है जिसके जरिये से कहीं भी आंकड़ों व कार्यक्रमों को  तत्काल प्राप्त या भेजा जा सकता है |

इंटरनेट का फुल फॉर्म – Interconnected Network

इंटरनेट का इतिहास – History Of Internet

Internet की शुरूआत साल 1970 या 1980 में हुई थी । इन्टरनेट ARPANET( एडवांस रिसर्च प्रोजेक्टस एजेंसी नेटवक ) के नाम से डिफेन्स डिपार्टमेंट के जरिये शुरु किया गया था। 1974 में कई लोकल एरिया नेटवर्क ARPANET से TCP/IP की मदद से कनेक्ट किये जाते थे सूचनाओं के आने और जाने के लिए जिस नियम का प्रयोग किया जाता है उसे ट्रांसमिशन कन्ट्रोल प्रोटोकाल या इंटरनेट प्रोटोकाल कहते हैं।

ट्रांसमिशन कन्ट्रोल प्रोटोकाल में डाटा कई छोटे-छोटे पैकेटों में Divide होता है जबकि इंटरनेट प्रोटोकाल का काम पैकेटों पर पहुँचने के पतों की सूचना डालना होता है। किसी भी कम्यूटर को इंटरनेट से जोड़ने के लिए टेलीफोन लाइन को इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर से जोड़ना पड़ता है।

भारत मे इंटरनेट सेवा की शुरुआत कब हुई ?

भारत में इंटरनेट सेवा ‘का सबसे पहले इस्तेमाल 15 अगस्त 1995 को विदेश संचार निगम लिमिटेड द्वारा किया गया था उसके बाद अन्य कम्पनियों द्वारा भी इंटरनेट का उपयोग मुख्य रुप से किया जाने लगा।

इंटरनेट की अवधारणा हिंदी में – Concept Of Internet In Hindi

जैसा की हम जानते हैं की इन्टरनेट एक विश्व दुनिया भर मे इस्तेमाल होने वाला एक नेटवर्क है जिसमें एक इन्टरनेट यूजर कोई सूचना खोजे तो उसे वेब सर्वर के द्वारा जवाब या सूचना मिलती है। ये सूचनाएं किसी वेबसाइट में लिखी हुई होती हैं जिन्हें हम इन्टरनेट द्वारा एक्सेस कर सूचनाएं पाते हैं। इन वेबसाइट का अपना एक डोमेन नेम होता है जो उस वेबसाइट का एड्रेस होता है जिसके माध्यम से इसे किसी वेब ब्राउजर की मदद से एक्सेस किया जाता है।

इन्टरनेट एक नेटवर्क सर्विस है जिसे किसी इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर कि मदद से इस्तेमाल किया जाता है। इन्टरनेट किसी की निजी प्रॉपर्टी (सम्पदा) नहीं होती है पर इसे मॉनिटर करने के लिए कुछ अथॉरिटी होती है जैसे इन्टरनेट आर्किटेक्चर बोर्ड और इन्टरनेट इंजीनियरिंग टास्क फोर्स । ये अथॉरिटीज इन्टरनेट पर टेक्निकल या ऑपरेशनल प्रॉब्लम (समस्याओं) को ठीक करते हैं और साथ ही साथ इन्टरनेट पर किसी नियम कानून को ज़ारी एवं निर्देशित करते हैं।

इंटरनेट आर्किटेक्चर की मूल बातें – Basics of internet architecture in Hindi

इन्टरनेट एक नेटवर्क होता है जो ज्यादातर क्लाइंट-सर्वर पर आधारित होता है और इन्टरनेट आर्किटेक्चर वो विषय है जिसमे हम इन्टरनेट को संचालित करने वाले नियम कानून, सच्चाई , नेटवर्किंग सिद्धांत इत्यादि को जानते एवं समझते हैं। जैसा की हम पहले ही नेटवर्किंग के प्रकार में चर्चा कर चुके हैं की नेटवर्क कई तरह के होते हैं लेकिन Usually डाटा या इनफार्मेंशन खोजते वक्त हम सूचना मांगते हैं और हमे इस्टेंट सूचना मिलती है। इस आधार पर यह ज्यादातर क्लाइंट-सर्वर नेटवर्किंग प्रतीत होता है जो इसका बेसिक आर्किटेक्चर हैं।

इंटरनेट आर्किटेक्चर में मुख्य रूप से निम्नलिखित शब्द शामिल हैं…

कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क – Content Delivery Network In Hindi:

कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क एक कटेंट डेलीवेरी नेटवर्क सर्वर होता है जो एक बड़े पैमाने में इन्टरनेट पर कई डाटा सेंटर को संचालित करता है। इसका उद्देश्य इन्टरनेट युजर को हर सूचना को अच्छी उपलब्धता में प्रदान करना है। कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क आज इंटरनेट पर कई तरह के कंटेंट को वितरित करता है जैसे टेक्स्ट, ग्राफिक्स, स्क्रिप्ट, मीडिया फाइल, सॉफ्टवेयर, डॉक्यूमेंट, ई-कॉमर्स, लाइव विडियो स्ट्रीमिंग, सोशल नेटवर्किंग इत्यादि।

डोमेन नेम सिस्टम – Domain Name System:

डोमेन नेम सिस्टम एक नाम निर्धारित करने एवं उनकी व्यवस्था का एक डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम है। यह डोमेन नेम को उनके सम्बंधित सूचनाओं से जोड़ता है ताकि उस डोमेन नेम से वो सम्ंधित सूचना को एक्सेस किया जा सके। यह डोमेन नेम को नंबर आधारित Ip एड्रेस में बदल देता है जिससे इसे इन्टरनेट पर कही भी स्थित किया जा सके। डोमेन नेम सिस्टम इन्टरनेट की कार्य सिस्टम में एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इंटरनेट प्रोटोकॉल – Internet Protocols:

इन्टरनेट प्रोटोकॉल सबसे मुख्य कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल होती है जो डाटाग्राम को नेटवर्क के सभी कोनों में पहुचाती है। इसके मुख्य कार्य इन्टरनेट नेटवर्किंग को स्थापित कर उसका संचालन करना है। ये सोर्स होस्ट से डाटा पैकेट को योग्य होस्ट तक पहुंचाती है। इसका काम एड्रेसिंग  मेथड को डिफाइन करना है साथ ही साथ डाटाग्राम को सोर्स को डेस्टिनेशन के साथ नामित करना है

नेटवर्क एड्रेस ट्रांसलेशन – Network Address Translation:

नेटवर्क एड्रेस ट्रांसलेटर एक नेट्वर्क प्रोटोकॉल होता है जो इन्टरनेट प्रोटोकॉल के अंतर्गत वही इन्टरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस को इस्तेमाल कर कई डिवाइस को पब्लिक नेटवर्क से जोड़ता है। नेटवर्क प्रोटोकॉल को इन्टरनेट प्रोटोकॉल (Pv4) की सहायता के लिए ही Developed किया गया है।

प्रॉक्सी सर्वर – Proxy Server:

प्रॉक्सी सर्वर एक सर्वर (एक कंप्यूटर सिस्टम या एप्लीकेशन) होता है जो किसी क्लाइंट कम्प्युटर को कोई रिसोर्स किसी अन्य सर्वर के माध्यम से पहुंचाता है। एक क्लाइंट पहले प्रॉक्सी सर्वर से कनेक्ट होता है जो किसी सर्विस या रिसोर्स की Request करता है जैसें कोई फाइल, Connection, वेब पेज या अन्य कोई रिसोर्स जो किसी अन्य सर्वर पर स्थिति होता हैं को पॉक्सी सर्वर की मदद से एक्सेस करता है। प्रॉक्सी सर्वर का निर्माण एक स्ट्रकचर और कई अन्य सर्वर सिस्टम को जोड़ने एवं पूरा करने के लिए हुआ हैं। आजकल कई वेब प्रॉक्सी आ गयी है जो इन्टरनेट पर दुनिया भर के Content को किसी रिक्वेस्ट पर Available कराती है।

 

इंटरनेट पर सेवाएँ – Services On Internet

इंटरनेट  एक Global Base सूचना सिस्टम है जो मल्टीमीडिया सूचना को दुनिया भर के करीब 4 मिलियन कम्युटरों सें Available कराता है। सामान्य रूप से इन्टरनेट User केवल World-Wide-Web को ही इंटरनेट एक एकमात्र Resources समझता है। लेकिन सच यह है कि इंटरनेट के द्वारा वेब इस्तेमाल तथा ई-मेल के इलावा भी अन्य Important सेवायें हासिल की जा सकती हैं। इन सेवाओं में फाइल ट्रासफर प्रोटोकॉल, इलेक्ट्रॉनिक मेल, गोफर, वर्ल्ड-वाइड वेब, टेलनेट, यूजनेट, राशि क्या है आदि हैं। इंटरनेट एप्लीकेशन एरिया की List काफी Detailed है जिसका फायदा कम्यूटर नेटवर्क Established कर किया जा सकता है।

वर्ल्ड वाइड वेब और वेबसाइट – World Wide Web And Websites

(वर्ल्ड वाइड वेब) प्रोग्राम Standard का एक सेट होता है जो इन्टरनेट पर किसी युजर को प्रोटोकॉल्स की मदद से वेब पेज को क्रिएट करने और एक्सेस करने की सुविधा देती है। ये वेबसाइट जो टेक्स्ट, इमेज, ग्राफिक्स, ऑंडियो और विडियो से मिलकर बनते हैं। बेबसाइट इंटरनेट पर क्रिएट और डिस्प्ले की जाने वाली एक फाइल होती है जो HTTP (हॉइपर टेक्सट ट्रॉन्सफर प्रोटोकॉल) के सपोर्ट से एक्सेस की जाती है।

ये सच्चाई है की इन्टरनेट, वर्ल्ड वाइड वेब या वेब काफी सामान्य रूप से बोलने जाने वाले शब्द हैं । वर्ल्ड वाइड वेब से इन्टरनेट पर हजारो सर्विसेज़ को एक्सेस करते हैं जबकि वेब डॉक्युमेंट, इमेजेज, और अन्य रिसोर्सेज का एक ग्लोबल सेट होता है जो logical तरीके में हाइपरलिंक से जुड़ी हई होती हैं और URI से सम्बंधित हो जाती हैं। हॉइपर टेक्स्ट ट्रान्सफर प्रोटोकॉल मुख्य प्रोटोकॉल होता है जो वर्ल्ड वाइड वेब पर एक्सेस Provide कराता है। वेब Services भी HTTP कि मदद लेकर जो किसी सॉफ्टवेयर सिस्टम से कम्यनिकेट कर कोई बिजनेस डाटा या लॉजिक को शेयर एवं एक्सचेंज करने की Permission देता है।

वेबसाइट क्या होता है – What is Website in Hindi?

एक डॉक्यूमेट जो किसी कम्प्युटर डाटा जैसे ग्राफिक्स,  साउंड,  टेक्स्ट,  ऑडियो,  विडियो,  अन्य मल्टीमीडिया एवं Effective कंटेंट का Group हो और वेब पर बतौर फाइल एक्सीक्यूट हो या प्रदर्शित हो, वेब पेज के नाम से जानी जाती हैं और इन वेब पेज के कलेक्शन को वेबसाइट कहते हैं। प्रत्येक वेबसाइट का अपना एक यूनिक एड्रेस होता है जिसके माध्यम से किसी वेब ब्राउजर की मदद से एक्सेस किया जा सकता है। वबेबसाइट को हम वेब ब्राउजर के URL बार में इंटर कर वेबसाइट एक्सेस करते हैं।

वेब पोर्टल – Web Portals

यह वो वेबसाइट होती है जो किसी विशेष डाटा या इनफार्मेशन के साथ-साथ कुछ अन्य वेबसाइट के लिंक को शामिल करता है जो इससे सम्बंधित सूचनाओं को Display करते हैं । वेब पोर्टल कई तरह के सर्विसेज प्रदान करने वाली वेबसाइट को कहते हैं जो किसी Special Group या Department की सूचना शामिल करता है|

वेब एड्रेस – Web Address

यह  एक यूनिक (अनोखा, Unique) एड्रेस होता है जो डोमेन नेम सिस्टम द्वारा Paid होता है जो किसी वेबसाइट से सम्बंधित सूचनाओं को एक्सेस करने की सुविधा देता है।

उपयोग किए गए URL के तत्व Elements of URLs Used…

  1. Protocols
  2. Web server
  3. Domain name
  4. प्रोटोकाल्स Protocols

1.प्रोटोकाल Communicate के लिए प्रोग्राम के सेट हैं PROTOCOLS ARE SET OF PROGRAM TO COMMUNICATE.

  • FTP (File Transfer Protocol)  एक पेड़ की तरह एक hierarchical structure में पाठ और बाइनरी फ़ाइलों को Arranged करता है
  • Gopher (Transmission Control protocol/Internet Protocol)  मेनू संरचना में पाठ या बाइनरी फ़ाइलों को व्यवस्थित करता है
  • HTTP (Hyper Text Transfer Protocol)  लिंक मल्टीमीडिया फाइल जैसे इमेज ग्राफिक्स ऑडियो और वीडियो को वर्ल्ड वाइड वेब पर भेजते हैं |
  • Mail (Simple Mail Transfer protocol)  इलेक्ट्रॉनिक संदेश भेजने का काम करता है |
  • News (Network New Transfer Protocol) Hierarchical structure में समाचार Group का आयोजन करता है

2. वेब सर्वर – Web server

वेब सर्वर एक रिमोट डेटाबेस होता है  जो किसी इन्टरनेट यूजर के वेब ब्राउजर द्वारा भेजे गए रिक्वेस्ट के आधार पर सम्बंधित सूचनाओं को Provide करता है।

3. डोमेन नेम – Domain Name

डोमेन नेम एक Potential value या Identifier का सेट होता है जो किसी वेबसाइट के उपनाम (Alias) Symbolic को दर्शाता है जैसे Google.com या Yahoo.com इत्यादि.

.Com-Commercial

.edu-Educational

.gov-Government

.mil-Military

.net-Networking

.org-Organization

.co-Company

.au-Australia

.ca-Canada

.in-India.

.fr-France

.nz-New Zealand.

.uk-United Kingdom

इंटरनेट पर कम्युनिकेशन – Communication On Internet

ईमेल Email: यह इन्टरमेट पर उपलब्ध काफी महत्वपूर्ण कम्यूनिकेशन सर्विस है । ईमेल को भेजने का Concept कुछ इस तरह है की इसे किसी निश्चित ईमेल आई०डी० पर कोई भी सन्देश जैसे टेक्स्, ग्राफिक्स, इमेज, ऑडियो और विडियों को किसी ईमेले मैसेंजर की मदद से भेज सकते है। कोई ईमेल यदि 64 kb से ज्यादा होता है तब इसे किसी फाइल में राइट कर फाइल अटैचमेंट प्रोटोकॉल की मदद से भेज सकते हैं।

इंटरनेट टेलीफोनी – Internet Telephony

इन्टरनेट टेलीफोनी एक ऐसी सेवा है जिसकी मदद से इन्टरनेट पर वार्तालाप जैसी सर्विस को इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एक तरह का प्रोटोकॉल होता है जो इन्टरनेट पर सभी तरह के कम्युनिकेशन को अंडरलाइन करती है। पिछले कुछ सालों से VOIP सिस्टम काफी आसान और एक सामान्य फोन की तरह इस्तेमाल होने लगा है। ये सामान्य टेलीफोन की कॉँल दर से काफी सस्ती होती है।

चैट – Chat

चैटिंग करना इन्टरनेट पर बातचीत करने या सन्देश भेजने से काफी मिलता जुलता है। आजकल यह ज्यादातर इस्तेमाल होने वाली कम्युनिकेशन है। अधिकतर वेब पोर्टल ये सर्विस मुफ्त में उपलब्ध करा रहे हैं। चैटिंग किन्ही दो या दो से अधिक या एक ग्रुप में होता है। चैटिंग के दौरान कम से कम दो पक्ष को ऑनलाइन होना जरुरी होता है। चैटिंग कई माध्यम में की जा सकती है जैसे टेकस्ट चैट, वायस चैट और विडियो चैट।

न्यूज़ ग्रुप या मैसेज बोर्ड – News Group Or Message Board

न्यूज़ ग्रुप या मैसेज बोर्ड एक तरह का आटोमेटिक चैनल होता है जो’ किसी विशेष सूचना को प्रसारित या वितरित करता है जिससे उस Fixed वेबसाइट से उन सूचनाओं को एक्सेस किया जा सकता है। न्यूज़ ग्रुप या मैसेज बोर्ड इंटरनेट यूजर को अपने वेब पोर्टल पर रजिस्टर कर सबंधित या मांगी गयी सूचना को भेजते है|

इंटरनेट सेवाएँ क्या क्या हैं – Internet Services

 इन्टरनेट सर्विसेज का मतलब इन्टरनेट पर विभिन्न सेवाओं को प्रदान एवं एक्सैस करने से है। आजकल इंटरनेट पर कई तरह की सर्विसेज उपलब्ध हैं।

Online Transaction: आजकल सभी बैंक, फाइनेंसियल कंपनी और साधारण यूजर सभी इंटरनेट पर ऑनलाइन ट्रंजेकशन करते हैं एक बैंक के लिए अपने कस्टमर के बही खाते में लेन-देन के ब्योरे को दिखाने और एंट्री करने के लिए तया फाइनेस कंपनी को फाइनेंसियल ट्रांजेक्शन को मुलभूत रूप देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।।

Searching: इन्टरनेट पर किसी भी तरह की सूचना एवं जानकारी के लिये हम विभिन्न सर्च इंजन की मदद से जानकारी ले सकते हैं।

Online Ticketing: इन्टरनेट की मदद से हम आज के समय में किसी भी ट्रेन का, एयरलाइन का, बस का, मूवी का टिकट आसानी से वेबसाइट के जरिये आनलाईन टिकट बुक करा सकते हैं।।

Online Application: आज के समय में हर सरकारी विभाग, प्राइवेट विभाग तथा अन्य महत्वपुर्ण सेवाएं को हासिल करने के लिए ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किये जाने लगे हैं।।

E-Communication: इन्टरनेट के माध्यम से हम इंस्टेट कम्यनिकेशन कर सकते हैं। जैसे ईमेल, चैट, फ्री SMS भेजना इत्यादि ।

Weather forecasting: इन्टरनेट की ही मदद से मौसम विभाग के समाचार एवं रिपोर्ट ऑनलाइन एक्सेस कर सकते हैं।

E-Commerce: इंटरनेट की मदद से हम कोई भी समान खरीद या बेच सकते हैं | आज मार्केट मे उपलब्ध आम इस्तेमाल की चीज़ें हम ऑनलाइन खरीद सकते हैं और इसका प्रचार प्रसार  कर सकते हैं

इन्टरनेट एक्सेस करने की तकनीक  Internet Access Techniques

इन्टरनेट एक्सेस करने की तकनीक  का मतलब अपने कम्प्युटर सिस्टम में इन्टरनेट एक्सेस करने की मुमकिन तरीकों को कैसे और किस तरह किया जाए

डायलअप Dialup:

डायल अप कनेक्शन एक मॉडेम तथा एक फोन कॉल जो पब्लिक स्विच टेलीफोन नेटवर्क में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर द्वारा संचालित मॉडेम के पूल को कनेक्ट करने के लिए पब्लिक प्लेस की जाती है। ये मॉडेम डिजिटल सिग्नल को एनालॉग सिग्नल में कन्वर्ट कर टेलीफोन लाइन के लोकल लूप से टेलीफोन कंपनी के स्विच फैसिलिटी या सेंट्रल ऑफिस जहाँ से ये दूसरे फोन लाइन जो इसे दुसरे मॉडेम से कनेक्ट करती है जहाँ से कनेक्शन प्रदान किया जा रहा है।

ब्राडबैंड Broadband:

इन्टरनेट एक्सेस करने की एक तकनीक है जो हायर डाटा. रेट एक्सेस प्रदान करता है। इस तकनीक में इन्टरनेट एक्सेस करने के लिए फाइबर ऑप्टिक केबल का इस्तेमाल किया जाता है।।

ISDN:

इंटीग्रेटेड सर्विस डिजिटल नेटवर्क एक स्विच टेलीफोन सर्विस के माध्यम से वायस एवं डिजिटल डाटा को ट्रांसपोर्रट करता है। इसका उपयोग वायस, विडियो कान्फ़्रेसिंग तथा ब्रॉडबैंड डाटा एफ्लीकेशन के लिए होता है।

लीजड लाइन  LeasedLine:

लीजड लाइन बिजनस, बड़े इंटरप्राइजेज में कंप्यूटर या कंप्यूटर नेटवर्क को पहले से पड़े पब्लिक टेलीफोन नेटवर्क या अन्य प्रोवाइडर को यूजकर इन्टरनेट से कनेक्ट करते है।

केबल इन्टरनेट  एक्सेस Cable Internet Access:

केबल इन्टरनेट, इन्टरनेट को एक्सेस करने के लिए फाइबर ऑप्टिक और कोएक्सिअल को मिला हाइब्रिड वायरिंग का इस्तेमाल करते हैं। ये पहले टेलीविजन सिग्नल को कैरी करने के लिए इस्तेमाल होता था। फाइबर ऑप्टिक या कोएक्सिअल कॉपर केबल कस्टमर के लोकेशन पर एक नोड से कनेक्ट होता है जिसे केबल ड्रॉप कहते हैं।

DSL connection:

डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन टेलीफोन नेटवर्क के भाध्यम से इन्टरनेट एक्सेस करने की सुविधा देता है। डॉयल अप कनेक्शन की तुलना में DSL किसी फोन लाइन के सामान्य उपयोग जैसे वायस कॉल करना इत्यादि से बाधित नहीं होता है। DSL हाई फ्रीक्वेंसी इस्तेमाल करता है जबकि लो (छुटी हुई) फ्रीक्वेसी को फ्री छोड़ देता है वायस कॉल करने के लिए। इस इन्टरनेट सर्विस और वायस कॉल सर्विस को अलग करने के लिए एक फिल्टर आपके कम्प्युटर स्थल पर इनस्टॉल किया जाता है।

वाई-फाई Wi-Fi

एक लोकप्रिय वायरलेस एरिया नेटवर्क है। वाई-फाई का फूल फॉर्म वायरलेस फिडेलिटी होता है। यह एक वायरलेस इन्टरनेट कनेक्शन होता है जो किसी यूजर को रेडियो तरगों के माध्यम से इन्टरनेट एक्सेस करने की सुविधा देती है। किसी फर्म, बिल्डिंग या कैम्पस में वाई-फाई का इस्तेमाल लैपटॉप या स्मार्टफोन को इन्टरनेट से कनेक्ट करने के लिए होता है । वाई-फाई हॉटस्पॉट आजकल ज्यादातर जगाहों पर इस्तेमाल होता है। इसका चलन अब बढ गया है।

Conclusion

Internet kya hai

दोस्तों आज हमने Internet kya hai और उसके बारे मे सारी जानकारी इस पोस्ट मे दी है उम्मीद है की आप लोगों को पसंद आई होगी अगर कुछ पूछना है तो आप Comments बॉक्स मे पूछ सकते हैं आप लोगों से गुजारिश है की इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा share करें

Also Read: कम्प्युटर कैसे कार्य करता है ?

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